शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

[वैश्विक हिंदी सम्मेलन ] यह कैसा मातृभाषा दिवस है ? - डॉ. वेदप्रताप वैदिक, झिलमिल में - विश्व मातृभाषा दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण वीडियों लिक



यह कैसा मातृभाषा दिवस है ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

आज सारी दुनिया के देश मातृभाषा दिवस मना रहे हैं। 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस क्यों मनाया जाता है ? क्योंकि यूनेस्को ने इसे 1999 में मान्यता दी थी। 21 फरवरी को इसलिए मान्यता दी गई क्योंकि इसी दिन 1952 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के नौजवानों ने अपनी मातृभाषा बांग्ला के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए थे। पाकिस्तान इन पर उर्दू थोप रहा था और वे बांग्ला चाहते थे। उर्दू तो पाकिस्तान की भी भाषा नहीं है। वह तो भारत से गए मुहाजिरों की भाषा है। पाकिस्तान की भाषाएं हैं— पंजाबी, सिंधी, पश्तो और बलूच आदि। वास्तव में मातृभाषा के इस आंदोलन ने 1971 में बांग्लादेश को अलग राष्ट्र के रुप में स्थापित किया। अब बांग्लादेश के साथ दुनिया के सभी देश 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के रुप में मनाते तो है लेकिन सारी दुनिया में आजकल मातृभाषाओं या राष्ट्रभाषाओं की स्थिति क्या है ? आप पांच महाशक्तियों, जापान, कनाडा, आस्ट्रेलिया,  न्यूजीलैंड तथा यूरोपीय राष्ट्रों जैसे देशों को छोड़ दें तो आज भी दुनिया के ज्यादातर देश भाषाई गुलामी का बोझ ढो रहे हैं। 

एशिया, अफ्रीका और लातीनी अमेरिका के देशों में अंग्रेजी, फ्रांसीसी, हिस्पानी आदि औपनिवेशिक भाषाओं का वर्चस्व बना हुआ है। जो देश पहले गुलाम रहे हैं, वे आज भी सांस्कृतिक दृष्टि से गुलाम है। उनके कानून, उनकी ऊंची शिक्षा, उनका न्याय, उनका प्रशासन अभी भी उनके पुराने मालिकों की भाषा में चलता है। वहां मातृभाषा अब भी नौकरानी है और मालिकों की भाषा महारानी है। भारत में इस गुलामी को महर्षि दयानंद, महात्मा गांधी और राममनोहर लोहिया ने चुनौती दी थी। हमारे वर्तमान नादान नेताओं को क्या कहें, वे मातृभाषाओं की रक्षा कैसे करेंगे, जब राष्ट्रभाषा ही भारत में पददलित हो रही है। दुनिया में अभी लगभग 7000 भाषाएं या बोलियां हैं। उनकी रक्षा नहीं होगी तो उनके साथ जुड़ी परंपराएं, मूलवृत्तियां, मूल्यमान और चिंतन पद्धतियों का भी लोप होता चला जाएगा।



विश्व मातृभाषा दिवस से संबंधित दो महत्वपूर्ण वीडियों लिक नीचे दिए हैं।









वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई

-- 
वैश्विक हिंदी सम्मेलन की वैबसाइट -www.vhindi.in
'वैश्विक हिंदी सम्मेलन' फेसबुक समूह का पता-https://www.facebook.com/groups/mumbaihindisammelan/
संपर्क - vaishwikhindisammelan@gmail.com

प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136




सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

वैश्विक हिंदी सम्मेलन ] मुंबई में 'वैश्विक हिंदी संगोष्ठी एवं रामदेव धुरंधर को 'वैश्विक हिंदी साहित्य सेवा सम्मान'। सिनेस्तान इंडियाज़ स्टोरीटेलर्स प्रतियोगिता में रोमन लिपि पर प्रतिक्रियाएँ -4



सिनेस्तान इंडियाज़ स्टोरीटेलर्स प्रतियोगिता में रोमन लिपि पर प्रतिक्रियाएँ -4

Inline image 1
डॉ. स्नेह ठाकुर 
म्पादक/प्रकाशक "वसुधा" हिंदी साहित्यिक पत्रिका, टोरांटो, कैनेडा,dr.snehthakore@gmail.com,   http://www.Vasudha1.webs.com

रोमन लिपि के इस विषय पर, वैश्विक हिंदी सम्मेलन की इस वेवसाइट पर, अनेक विद्वानों द्वारा बहुत ही सारगर्भित, तथ्य-संदर्भित, विस्तृत-रूप से लिखा गया है. अत: पुनरावृत्ति को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें दोहराना नहीं चाहूँगी। पर हाँ! रोमन लिपि के पक्षधारियों से, विशेष-रूप से आमिर ख़ान जी से, सद्भावी-रूप से, यह जानने की इच्छुक हूँ कि वे अपना नाम रोमन लिपि में कैसे लिखते हैं? अँग्रेजी में उनका नाम Amir, और कहीं-कहीं Aamir भी देखा गया है. जो लोग उनसे ज़्यादा परिचित नहीं हैं, उन्हें Amir "अमीर" बुलाते हैं. रोमन लिपि में यदि लिखा जाए कि, amir hans rahe hain  या   amir has rahe hain तो क्या इसे यह पढ़ना यथोचित नहीं होगा  - "अमीर हंस रहे हैं?" या   "अमीर हस रहे हैं?" 

"आमिर हँस रहे हैं" को रोमन में आप कैसे लिखेंगे? अमीर Amir और आमिर Aamir में अंतर किया जा सकता है, पर "हंस" (जलचर पक्षी) और "हँस" (हँसना - अभिव्यक्ति क्रिया) का क्या करेंगे? बड़े-बड़े शब्द तो छोड़ ही दीजिए मैं तो हिंदी के छोटे-छोटे शब्दों के लिए ही नहीं समझ पा रही हूँ कि उन्हें रोमन लिपि में लिख कर उनका यथावत् उच्चारण कैसे करूँ? उदाहणार्थ  "में" रोमन में इसके लिए   "men"   तो    मेन    men ( अर्थात्  पुरुष ) बन जाता है,    me   लिखूँ तो   मे   बन जाता है.  
हाँ! यह तर्क अवश्य दिया जा सकता है कि अरे, हिंदी भाषी को क्या   हँस    और    हंस    का अन्तर नहीं पता होगा कि    हँस   हँसी   से सम्बंधित है और    हंस   जलचर पक्षी है. पर फिर ऐसी अवस्था में प्रश्न यह उठता है कि यदि व्यक्ति हिंदी भाषा-ज्ञानी है तो उसके लिए रोमन लिपि के दाँव-पेंच की क्या आवश्यकता? और यदि वह हिंदी भाषा ज्ञानी नहीं है और हिंदी जानना चाहता है तो उसे हिंदी की रोमन लिपि में गलत हिंदी सिखाने-पढ़ाने से क्या फ़ायदा? क्यों न ऐसे व्यक्ति को सीधे-सीधे देवनागरी लिपि में ठीक हिंदी पढाई जाए, रोमन लिपि के  सही-गलत उच्चारण की अपेक्षा हिंदी की देवनागरी लिपि द्वारा यथोचित् उच्चारण से अवगत कराया जाए. यदि हिंदी आती है तो समस्या क्या है और यदि नहीं आती तो गलत रीति से हिंदी सीखना हानिकारक होगा।
"कॉमेडी फिल्मों" में तो शायद रोमन लिपि में लिखी गई हिंदी से तो काम चल जाए पर अन्य क़िस्म की फिल्मों में यह हास्यास्पद ही होगा. साथ ही बोलचाल की भाषा में तो फिर भी हिंदी का गलत उच्चारण चल जाए (यद्यपि कि वह भी ठीक नहीं है) पर क्या फिल्म इंडस्ट्री रोमन लिपि में लिखी गई गलत उच्चारण वाली हिंदी का ख़तरा मोल ले सकती है?

 रोमन लिपि में हर कोई भाषा को तोड़ेगा, मरोड़ेगा, उसका उच्चारण अपनी सुविधानुसार कर, उसके रूप के साथ खिलवाड़ कर अर्थ का अनर्थ कर देगा. अत: भाषा की शुद्धता हेतु हिंदी की देवनागरी लिपि की सुरक्षा अत्यावश्यक है. हमें हिंदी की जड़ सींचनी है न कि कुछ लोगों द्वारा रोमन लिपि की तथाकथित सुगमता की बातों में आकर हिंदी के पत्तों को सींचकर केवल उसकी ऊपरी सतह पर थोड़ा-सा छिड़काव कर उसकी जड़ को खोखला करना है. 
हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है. यह ध्वन्यात्मक लिपि है. देवनागरी की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें जैसा लिखा जाता है वैसा ही बोला जाता है, जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है, जबकि दूसरी भाषाओं में यह बात नहीं है जो कि सर्वविदित, विश्व-विदित है. ऐसी स्थिति में, विशेषरूप से आज जब हिंदी की वैश्विक पहचान बन रही है, हिंदी देवनागरी लिपि में न लिख रोमन लिपि में लिखना, फिल्म इंडस्ट्री क्या देश  के लिए भी हितकर नहीं होगा. 


 वीना सिंह  veena2605@gmail.com


अति सुंदर विचार हिंदी के प्रतिआप लोगों के  हैं। हिंदी कहानी लेखन में रोमन की अनिवार्यता फ़िल्म उद्योग के लोगों की है वह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नही होना चाहिए।  जिस तरह की भावना लोगों की है वह अति दुखद है। वास्तविकता तो यह है कि लोगों के हृदय में हिंदी के  प्रति सम्मान नही है सिर्फ औपचारिकताएं पूरा करने के लिए लोग हिंदी सीख रहे हैं अब जबकि आपलोगों ने इस मुद्दे को उठाया है तो निश्चित रूप से कुछ सकारात्मक समाधान होगा।



सदानन्द गुप्ता
   guptasadanand52@gmail.com   



जिसने प्रतियोगिता का शीर्षक ही अँग्रेजी में  रखा हो उससे क्या उम्मीद की जाय .वे लोग अँग्रेजी के गुलाम हैं ही .  


जोगा सिंह  virkjoga5@gmail.com

जब स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी आज तक हर लाभ और प्रभुत्व वाली जगह पर हिंदी/भारतीय भाषाओं की अंग्रेजी के हाथों पिटाई हो रही हो और पूरा शासक वर्ग केवल तालियाँ ही नहीं बजा रहा हो बल्कि पिटाई करने वालों के हाथों में डंडे थमा रहा हो तो आमिर खान जैसो से हम बेहतर भाषिक व्यवहार की आशा नहीं कर सकते| सीबीएसइ से पूछिये कि क्या उनके स्कूलों में भारतीय भाषाओं में बात करने की भी इजाजत है! वहां तो किसी भारतीय भाषा को रोमन में भी न लिखने दें| और यह बात माननीय भारतीय गृह मंत्री जी से छुपी हुई नहीं है| मैंने तो आज तक कोई सरकारी ब्यान नहीं पढ़ा है जिसमे इस राष्ट्रीय अपराध की निंदा मात्र की गई हो, सजा तो दूर की बात है| माननीय, उस गंदगी को पकड़ें जहाँ से यह विषाणू पैदा होते हैं| 
कोई शब्द कटु लगे तो क्षमा करना|



वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई




वैश्विक हिंदी सम्मेलन की वैबसाइट -www.vhindi.in
'वैश्विक हिंदी सम्मेलन' फेसबुक समूह का पता-https://www.facebook.com/groups/mumbaihindisammelan/
संपर्क - vaishwikhindisammelan@gmail.com

प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारकाविश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136


[वैश्विक हिंदी सम्मेलन ] ई-रेल के मानचित्र में देवनागरी . हरिराम...


आदरणीय महोदय,

भारत सरकार के रेलवे मानचित्र ई-रेल के ऑनलाइन मानचित्र में भारत के विभिन्न स्थानों के नाम अंग्रेजी और उस स्थान की अधिकृत लिपि में ही दर्शाए गए हैं।

यथा बंगाल में अंग्रेजी-बंगला
गुजरात में अंग्रेजी-गुजराती
कर्णाटक में अंग्रेजी-कन्नड़
तमिनलाडु में अंग्रेजी-तमिल
केरल में अंग्रेजी-मलयालम
हिंदीभाषी प्रदेशों में अंग्रेजी-देवनागरी में

...
...

काश कि सभी स्थानों के नाम देवनागरी लिपि में होते तो सभी स्थानों के नामों का सभी सही उच्चारण तो कर पाते। गलत उच्चारण करके उस स्थान का नाम बिगड़/बदनाम तो नहीं होता।

संदर्भ हेतु स्क्रीन-शॉट की इमेज संलग्न है।

सादर।


हरिराम
प्रगत भारत <http://hariraama.blogspot.in>


-- 
वैश्विक हिंदी सम्मेलन की वैबसाइट -www.vhindi.in
'वैश्विक हिंदी सम्मेलन' फेसबुक समूह का पता-https://www.facebook.com/groups/mumbaihindisammelan/
संपर्क - vaishwikhindisammelan@gmail.com

प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136